कारीगर स्वर्णिम भारत के वास्तविक निर्माता हैं
अतिरिक्त महासचिव मृत्युंजय भाईजी ने कहा
कि भारत की पहचान केवल उसकी संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत से ही नहीं, बल्कि शिल्पकारों,
मूर्तिकारों और कारीगरों के अद्भुत हुनर से भी बनी है। उन्होंने कहा कि कुशल हाथों
के साथ जब श्रेष्ठ संस्कार और आध्यात्मिक ज्ञान जुड़ते हैं, तब राष्ट्र निर्माण को
नई ऊँचाई मिलती है। उन्होंने विश्वकर्मा निर्माण विंग को इस सेवा अभियान को निरंतर
आगे बढ़ाने की शुभकामनाएँ दीं।
छोटा बीज आगे चलकर वटवृक्ष बनेगा
साइंटिस्ट, इंजीनियर एंड आर्किटेक्ट विंग
के नेशनल कोऑर्डिनेटर बीके भरत भूषण भाई ने कहा कि कारीगर और श्रमिक भारत के विकास
की आधारशक्ति हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वकर्मा निर्माण विंग आज एक
छोटे बीज की तरह है, जो भविष्य में विशाल वटवृक्ष बनकर समाज और राष्ट्र निर्माण में
महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने विंग को हर संभव सहयोग का आश्वासन भी दिया।
ईमानदारी और परमात्म-प्रेम देते हैं जीवन की शक्ति
सिक्योरिटी विंग के नेशनल कोऑर्डिनेटर
बीके कर्नल सती भाई ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि निष्ठा, ईमानदारी और परमात्म-प्रेम
व्यक्ति को हर चुनौती का सामना करने की आंतरिक शक्ति प्रदान करते हैं। उन्होंने कर्मयोगी
जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।
कुशल हाथों से राष्ट्र, शक्तिशाली मन से जीवन निर्माण
विश्वकर्मा निर्माण विंग के मधुबन कोऑर्डिनेटर
बीके कीर्ति भाई ने कहा कि विंग का उद्देश्य कारीगरों, शिल्पकारों और श्रमिकों के हुनर
का सम्मान करते हुए उन्हें ज्ञान, राजयोग और सकारात्मक जीवन-दृष्टि से जोड़ना है। उन्होंने
सभी अतिथियों, सहयोगियों एवं उपस्थित भाई-बहनों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में बीके पूजा बहन एवं बीके सलोनी बहन ने तिलक एवं अंगवस्त्र भेंटकर अतिथियों का भावभीनी स्वागत किया। समारोह में विभिन्न सेवा विंगों के प्रतिनिधियों, भाई-बहनों एवं सहयोगियों ने भाग लेकर विश्वकर्मा दिवस तथा विंग की प्रथम वर्षगांठ पर शुभकामनाएँ दीं।
