ब्रह्माकुमारी संस्था के 90 वर्ष पूर्ण होने पर जुटीं देश-विदेश की 6,000 से अधिक हस्तियां
• 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों की सहभागिता
• त्याग, तपस्या और सेवा के अग्रदूतों का हुआ सम्मान
• बीके शिवानी बहन ने कहा - विश्व बदलना है तो स्वयं से करनी होगी शुरुआत
आबू रोड, राजस्थान।
आध्यात्मिक जागृति और विश्व नवनिर्माण के संकल्प के साथ ब्रह्माकुमारी संस्था के
90 वर्ष पूर्ण होने पर आबू रोड के शांतिवन में चार दिवसीय वैश्विक सम्मेलन-2026 का
भव्य शुभारंभ हुआ। ‘विश्व नवनिर्माण के लिए आध्यात्मिक जागृति’ विषय पर आयोजित सम्मेलन
में 130 देशों के 6,000 से अधिक विशिष्ट अतिथि भाग ले रहे हैं। संस्था की नौ दशक लंबी आध्यात्मिक यात्रा के इस ऐतिहासिक अवसर पर
शांति, आत्मिक जागृति और श्रेष्ठ मानवीय मूल्यों के माध्यम से नए विश्व के निर्माण
का संकल्प मुखर हुआ।

आबू रोड के शांतिवन में ब्रह्माकुमारी संस्था के 90 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित वैश्विक सम्मेलन का मंच, बेनेडिक्टरी एंड वेलकम सेरेमनी में मौजूद विशिष्ट अतिथि
त्याग, तपस्या और सेवा के अग्रदूतों का सम्मान
सम्मेलन के स्वागत सत्र में संस्था में 50 वर्षों से अधिक समय से सेवाएं दे रहे समर्पित भाई-बहनों का पगड़ी, पट्टा, बैज, पुष्पहार और पुष्पगुच्छ भेंट कर भव्य अभिनंदन किया गया।

ब्रह्माकुमारी संस्था में 50 वर्षों से अधिक सेवा देने वाली बहनों का वैश्विक सम्मेलन में भव्य अभिनंदन
यह सम्मान उन महान आत्माओं के त्याग,
तपस्या, निष्ठा और अथक सेवाओं के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक बना, जिन्होंने अपना जीवन
मानवता के आध्यात्मिक कल्याण के लिए समर्पित किया है।
महाराष्ट्र के अय्यानगर से आए युगंधर वाद्य पथक ने ढोल, ताशे, नगाड़े और घंटियों की मनमोहक धुनों से अतिथियों का भावभीना स्वागत किया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज से पूरा शांतिवन उत्साह और उल्लास से गुंजायमान हो उठा।
परमात्मा के ज्ञान ने बनाया वैश्विक परिवार - राजयोगिनी मोहिनी
दीदी
संस्था की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी मोहिनी
दीदी ने कहा कि प्रजापिता ब्रह्मा बाबा परमात्मा शिव के ज्ञान, संदेश और आदेश के माध्यम
बने। उन्होंने इस दिन को खुशी और गौरव का अवसर बताते हुए कहा कि ब्रह्मा बाबा और शिवबाबा
की छत्रछाया में मिली शिक्षाओं और मार्गदर्शन के लिए वे हृदय से आभारी हैं।

आबू रोड के शांतिवन में आयोजित वैश्विक सम्मेलन में सभा को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारी संस्था की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी मोहिनी दीदी
उन्होंने कहा कि परमात्मा का परिचय मिलने
से सभी आत्माओं के बीच आत्मिक संबंध स्थापित हुआ और भाई-बहनों का एक ऐसा परिवार बना,
जिसमें विभिन्न धर्मों, भाषाओं और देशों के लोग जुड़े हैं। ब्रह्माकुमारी संस्था इस
वैश्विक परिवार का जीवंत उदाहरण है। बाबा की शिक्षा केवल ज्ञान तक सीमित नहीं रही,
बल्कि उनके जीवन के आदर्शों ने निर्णय लेने और श्रेष्ठ धारणाएं अपनाने की प्रेरणा दी।
इसी उद्देश्य से ईश्वरीय ज्ञान और राजयोग की शिक्षा देने वाला आध्यात्मिक विश्वविद्यालय
विकसित हुआ, जिसने विश्वभर में लोगों के जीवन को नई दिशा दी।
दादियों के त्याग और तपस्या से विशाल वटवृक्ष बना संगठन -
राजयोगिनी मुन्नी दीदी
संस्था की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी
मुन्नी दीदी ने अपनी छह दशक से अधिक की यात्रा के अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने
संस्था को एक छोटे से पौधे से विशाल वटवृक्ष बनते अपनी आंखों से देखा है। उन्होंने
कहा कि इस विकास के पीछे परमपिता परमात्मा शिव बाबा की शक्ति के साथ-साथ दादियों और
दीदियों का अथक समर्पण भी रहा है।

आबू रोड के शांतिवन में आयोजित वैश्विक सम्मेलन में सभा को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारी संस्था की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी मुन्नी दीदी
उन्होंने कहा कि जिन दादियों ने अपना जीवन
त्याग, तपस्या और सेवा में समर्पित कर संस्था को आगे बढ़ाया, उनका योगदान कभी भुलाया
नहीं जा सकता। उनका जीवन आज भी सभी के लिए प्रेरणा का प्रकाशस्तंभ है।
शांति और महिला सशक्तिकरण की वैश्विक गंगोत्री है ब्रह्माकुमारी
संस्था - डॉ. हिमान जोशी
वडोदरा के सांसद एवं भारतीय जनता युवा
मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हिमान जोशी ने ब्रह्माकुमारी संस्था की भूमि को शांति
की ऐसी गंगोत्री बताया, जहां से विश्वभर में शांति का संदेश प्रवाहित हो रहा है। उन्होंने
कहा कि महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण ब्रह्माकुमारी संस्था है, जहां समर्पित
बहनें विश्व के कोने-कोने में शांति और श्रेष्ठ जीवन का संदेश दे रही हैं।

आबू रोड के शांतिवन में ब्रह्माकुमारी संस्था के 90 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित वैश्विक सम्मेलन में देश-विदेश से आए 6000 से अधिक विशिष्ट अतिथि और प्रतिनिधि
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया
कि राजयोग का कोर्स करने के छह महीने के भीतर उनके जीवन में ऐसी परिस्थितियां बनीं,
जिनसे उन्हें गुजरात और देश की राजनीति में युवा सांसद के रूप में सेवा करने का अवसर
मिला।
90 वर्षों की यात्रा, मानवता को जगाने का संकल्प - बीके करूणा भाई
संस्था के महासचिव राजयोगी बीके करूणा
भाई ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि यहां उपस्थित लोगों की सहभागिता शांति,
श्रेष्ठ मानवीय मूल्यों और जिम्मेदार नेतृत्व के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती
है। उन्होंने कहा कि वैश्विक सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि ब्रह्माकुमारी संस्था
की 90 वर्षों की ईश्वरीय सेवा का उत्सव है।

आबू रोड के शांतिवन में आयोजित वैश्विक सम्मेलन में सभा को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारी संस्था के महासचिव राजयोगी बीके करूणा भाई
उन्होंने स्मरण कराया कि वर्ष 1936 में
एक छोटी-सी सभा से शुरू हुई इस आध्यात्मिक यात्रा का उद्देश्य ईश्वरीय ज्ञान के माध्यम
से मानवता को जागृत करना और विश्व परिवर्तन के कार्य में माताओं-बहनों को अग्रणी भूमिका
देना था। आज 130 से अधिक देशों तक पहुंचा यह अभियान आध्यात्मिक जागृति और वैश्विक एकता
का संदेश दे रहा है।
मानवता के कल्याण में समर्पित आत्माओं का अभिनंदन - डॉ. राजीव बिंदल

आबू रोड के शांतिवन में आयोजित वैश्विक सम्मेलन में सभा को संबोधित करते हुए हिमाचल प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल
हिमाचल प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष डॉ. राजीव
बिंदल ने वैश्विक सम्मेलन-2026 और नवदशकोत्सव के अवसर पर मिले स्नेह एवं आशीर्वाद के
लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह अवसर उन महान आत्माओं के अभिनंदन का है,
जिन्होंने दशकों तक अपना संपूर्ण जीवन मानव मात्र के आत्मिक कल्याण के लिए समर्पित
कर दिया।
दुनिया बदलने की शुरुआत स्वयं को बदलने से होगी - बीके शिवानी बहन
अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशनल वक्ता एवं राजयोग
शिक्षिका बीके शिवानी बहन ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में आत्मपरिवर्तन को विश्व परिवर्तन
का आधार बताया। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति चाहता है कि संसार बदले, लेकिन वास्तविक
प्रश्न यह है कि बदलाव की शुरुआत कौन करेगा? जिस प्रकार घर में कोई समस्या होने पर
उसे ठीक करने की जिम्मेदारी स्वयं उठानी पड़ती है, उसी प्रकार दुनिया को बेहतर बनाने
के लिए भी प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी होगी।

आबू रोड के शांतिवन में आयोजित वैश्विक सम्मेलन में सभा को संबोधित करते हुए अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशनल वक्ता बीके शिवानी दीदी
उन्होंने कहा कि केवल दूसरों की ओर उंगली
उठाने और बदलाव की प्रतीक्षा करने से संसार नहीं बदलेगा। आज मानवता ऐसे दौर में है,
जब आध्यात्मिक जागृति और आंतरिक परिवर्तन की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।
आंतरिक रावण
का अंत ही रामराज्य की शुरुआत:
बीके शिवानी बहन ने नवरात्रि, शक्तियों
के जागरण और रावण दहन के उदाहरण से समझाया कि वास्तविक विजय अपने भीतर की कमजोरियों
पर प्राप्त करनी है। रावण के दस सिर मनुष्य के भीतर मौजूद विकारों और कमजोरियों के
प्रतीक के रूप में समझे जा सकते हैं। हम किसी एक कमजोरी को दूर करने का प्रयास करते
हैं, लेकिन कुछ समय बाद वह फिर उभर आती है। इसका स्थायी समाधान आत्मिक जागृति में निहित
है।

आबू रोड शांतिवन वैश्विक सम्मेलन में उपस्थित अतिथियों का दृश्य
उन्होंने कहा कि देहभान और देह-अभिमान
से ऊपर उठकर स्वयं को आत्मा के रूप में अनुभव करना आंतरिक परिवर्तन की महत्वपूर्ण कुंजी
है। जब व्यक्ति अपनी सोच, संस्कार और व्यवहार को श्रेष्ठ बनाता है, तभी परिवार, समाज
और विश्व में सकारात्मक बदलाव का मार्ग प्रशस्त होता है। सच्ची आत्मनिर्भरता का अर्थ
भी अपनी आंतरिक शक्तियों को जागृत करना है।
देश-विदेश की अनेक विशिष्ट हस्तियों ने दीं शुभकामनाएं
सम्मेलन में प्रसिद्ध अभिनेत्री अक्षरा
सिंह, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर कुलदीप सिंघानिया, श्री सत्य साईं मानव उत्कृष्टता विश्वविद्यालय
के कुलाधिपति बी.एन. नरसिम्हा मूर्ति, ग्लोबल पीस फाउंडेशन एवं इंडो-पैसिफिक पीस फोरम
के अध्यक्ष डॉ. मार्कंडेय राय, एबीपी न्यूज़ के परामर्श संपादक संदीप चौधरी, कल्पतरु
संस्थान के संस्थापक विष्णु लांबा, ‘सेल्फी विद डॉटर’ अभियान के संस्थापक सुनील जगलान,
अमृता विद्यालयम दिल्ली की प्राचार्य ब्रह्मचारिणी चिन्मयामृता चैतन्या तथा ऑल इंडिया
इमाम ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख इमाम डॉ. उमर अहमद इलियासी सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित
रहे। सभी ने इस आयोजन के प्रति अपनी शुभकामनाएं व्यक्त कीं।

आबू रोड में आयोजित वैश्विक सम्मेलन को संबोधित करते हुए बीके प्रकाश भाई
कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ राजयोगी बीके
प्रकाश भाई ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। मंच संचालन बीके रूपेश भाई ने किया।
नौ दशक की
साधना से नए विश्व की ओर
ब्रह्माकुमारी संस्था के 90 वर्ष पूर्ण होने का यह अवसर केवल अतीत की उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक नई जिम्मेदारी का आह्वान भी है। आध्यात्मिक जागृति, आत्मपरिवर्तन, महिला सशक्तिकरण और मानवीय मूल्यों के आधार पर विश्व को एक परिवार बनाने का संकल्प इस वैश्विक सम्मेलन का केंद्रीय संदेश बनकर उभरा।