बाबा मिलन में उमड़ा 20 हजार भाई-बहनों का स्नेह, स्वमान और दृढ़ संकल्प से जीवन सजाने का मिला संदेश
आबू रोड, राजस्थान 15 अक्टूबर 2026। परमात्मा से मिलन की खुशी, गहन शांति का अनुभव और जीवन को श्रेष्ठ
बनाने का संकल्प - ब्रह्माकुमारी संस्था के मुख्यालय शांतिवन स्थित डायमण्ड हॉल में
बाबा मिलन सीजन के प्रथम टर्न का दृश्य कुछ ऐसा ही रहा। लगभग 20 हजार भाई-बहनों ने
एकाग्रता और मौन के साथ परमात्मा की वाणी सुनी और आध्यात्मिक शांति का अनुभव किया।
परमात्म मिलन के पश्चात सभी के चेहरों पर अलौकिक खुशी और दिव्यता की झलक दिखाई दी।
इस अवसर पर संस्था की संयुक्त मुख्य प्रशासिका
राजयोगिनी शशि दीदी ने परमात्मा को भोग स्वीकार कराया। कार्यक्रम के बाद सभी भाई-बहनों
को टोली वितरित की गई। पूरे आयोजन में स्नेह, समर्पण और परमात्म मिलन की खुशी का भाव
दिखाई दिया।
90 वर्ष के यज्ञ की संपन्नता पर स्वमान और समय के महत्व का संदेश
बाबा मिलन के प्रथम टर्न को संबोधित करते
हुए संस्था की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी मोहिनी दीदी ने कहा कि आज हम 90 वर्ष के यज्ञ
की संपन्नता मना रहे हैं। आज की मुरली में बाबा ने बहुत संक्षिप्त लेकिन गहरी बातों
के माध्यम से स्वमान में स्थित रहने, समय के महत्व को समझने, हर कार्य में एकाग्रता
रखने और ‘सदा’ शब्द पर विशेष ध्यान देने की प्रेरणा दी। इसके साथ ही अलबेलेपन का त्याग
कर जीवन के हर पल को सफल बनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सेवा में वृद्धि के
साथ-साथ बाबा की श्रीमत के अनुसार एक-दूसरे को स्नेह, सहयोग और सम्मान देना भी आवश्यक
है। उन्होंने सभी को शुभकामनाएं देते हुए दृढ़ संकल्प के साथ परमात्मा की शिक्षाओं
को जीवन में उतारने का आह्वान किया।
स्वमान में रहकर स्वयं को श्रेष्ठ बनाने की प्रेरणा
संस्था की सह-मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी
मुन्नी दीदी ने कहा कि बाबा अपने बच्चों को सदा श्रेष्ठ गुणों और स्वमान से सजाते रहते
हैं। संगमयुग का यह समय अपनी स्थिति को श्रेष्ठ बनाने, सेवा करने और परमात्मा के साथ
कदम से कदम मिलाकर चलने का है।
उन्होंने कहा कि बाबा ने हमें अनेक स्वमानों
की स्मृति दिलाई है। अब आवश्यकता है कि हम अपनी आंतरिक गरिमा को पहचानें, ऊंची स्थिति
में रहें और इन श्रेष्ठ स्मृतियों को जीवन में धारण करते हुए निरंतर आगे बढ़ें।
संगमयुग का हर पल अनमोल, श्रेष्ठ प्राप्तियों का अभी समय
संस्था की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी
जयंति दीदी ने पंजाब से आए भाई-बहनों का विशेष अभिनंदन किया। उन्होंने पंजाब में सेवाओं
की शुरुआत और विस्तार से जुड़ी स्मृतियां साझा करते हुए कहा कि यह सभी के लिए सौभाग्य
की बात है कि बाबा और मम्मा अनेक बार पंजाब की धरनी पर पहुंचे।
जयंति दीदी ने कहा कि संगमयुग का यह छोटा-सा
समय महान प्राप्तियों से भरा हुआ है। परमात्मा इस समय आत्माओं को मास्टर सर्वशक्तिमान
बनने की शिक्षा दे रहे हैं। इसलिए अपने स्वमान में स्थित होकर परमात्मा के दिलतख्त
पर विराजमान होने की इस अनमोल प्राप्ति को पहचानना चाहिए। उन्होंने प्रेरणा दी कि विश्व
की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए जो श्रेष्ठ कार्य करने हैं, उन्हें अभी दृढ़
संकल्प के साथ पूरा करना चाहिए।
20 हजार भाई-बहनों का मौन बना आध्यात्मिक शक्ति का अनुभव
संस्था के महासचिव राजयोगी बीके करुणा
भाई ने पंजाब सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए भाई-बहनों के सेवा-समर्पण की सराहना
की। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में भाई-बहनों की उपस्थिति और निर्धारित संख्या
से भी अधिक लोगों का पहुंचना उनके उमंग-उत्साह को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि लगभग 20 हजार लोगों के
बीच दिखाई देने वाला गहन मौन और एकाग्रता विशेष अनुभव था। इस दृश्य ने उन्हें आदरणीय
चंद्रमणि दादी जी की स्मृति भी दिलाई। उन्होंने कहा कि बाबा ने सभी बच्चों को उमंग,
उत्साह और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम में संस्था की संयुक्त मुख्य
प्रशासिका राजयोगिनी शशि दीदी तथा अतिरिक्त महासचिव डॉ. मृत्युंजय भाई ने भी अपने विचार
एवं शुभकामनाएं व्यक्त कीं। मंच संचालन अंबावाड़ी सेवाकेंद्र की संचालिका राजयोगिनी
शारदा दीदी ने किया।
बाबा मिलन का संदेश स्पष्ट है - स्वमान में स्थित रहें, समय का महत्व पहचानें, एक-दूसरे को स्नेह और सम्मान दें तथा परमात्मा से मिली शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारें। यही दृढ़ संकल्प आध्यात्मिक उन्नति और श्रेष्ठ जीवन की दिशा में आगे बढ़ने का आधार है।






