आध्यात्मिक जागृति से विश्व परिवर्तन का संदेश, मानसरोवर में 2,000 प्रतिभागियों का राष्ट्रीय सम्मेलन

आबू रोड, मानसरोवर। ब्रह्माकुमारीज़ के समाज सेवा प्रभाग द्वारा मानसरोवर परिसर में “आध्यात्मिक जागृति से विश्व परिवर्तन” विषय पर चार दिवसीय राजयोग शिविर एवं राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 2,000 समाजसेवी भाई-बहनों ने सम्मेलन में सहभागिता कर आध्यात्मिक जीवन, मानवीय मूल्यों एवं समाज सेवा का संकल्प लिया।

Brahma Kumaris Mansarovar Hosts 4-Day National Rajyoga Conference with 2,000 Participants

सम्मेलन का शुभारंभ भारतीय सनातन संस्कृति की परंपरा के अनुरूप मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रतिभागियों का तिलक, अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया।

आध्यात्मिकता ही विकसित भारत का आधार : प्रदीप बत्रा

उत्तराखण्ड सरकार के परिवहन एवं सूचना मंत्री प्रदीप बत्रा ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि मानसरोवर में उन्हें शांति, अनुशासन, आत्मीयता और सेवा की अद्भुत अनुभूति हुई। उन्होंने किसी भी संस्था की सफलता के लिए पाँच “D” — Duty (कर्तव्य), Discipline (अनुशासन), Devotion (समर्पण), Dedication (निष्ठा) और Discrimination (सद्-विवेक) — को जीवन का मूल आधार बताया।

उन्होंने कहा कि हम सुधरेंगे तो जग सुधरेगा केवल एक नारा नहीं, बल्कि विश्व परिवर्तन का व्यावहारिक सूत्र है। विकसित भारत का निर्माण केवल सड़क, भवन या तकनीकी प्रगति से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक रूप से जागृत नागरिकों से होगा। उन्होंने सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा, पर्यावरण संरक्षण, जल एवं बिजली बचाने तथा प्राकृतिक संसाधनों के प्रति कृतज्ञता को प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य बताया।

प्रदीप बत्रा ने कहा कि आने वाला युग एआई, क्वांटम फिजिक्स और आधुनिक तकनीक का है, किंतु यदि तकनीक के साथ मानवीय मूल्य और आध्यात्मिकता नहीं जुड़ेंगे तो विकास अधूरा रहेगा। उन्होंने तकनीक का सदुपयोग करते हुए आत्मिक चेतना को समान महत्व देने का आह्वान किया।

पश्चिमी प्रभाव के बीच भारतीय संस्कारों की आवश्यकता : रणधीर पनीहार

हरियाणा के नलवा विधानसभा क्षेत्र के विधायक रणधीर पनीहार ने ब्रह्माकुमारी संस्थान की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि प्रातः चार बजे से प्रारंभ होने वाला अनुशासित आध्यात्मिक जीवन भारत की प्राचीन संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत करता है।

उन्होंने कहा कि पश्चिमी सभ्यता के बढ़ते प्रभाव के दौर में समाज को सही दिशा देने के लिए ऐसे आध्यात्मिक संगठनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। युवाओं में संस्कार और बुजुर्गों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

आत्मिक बल से ही बुराइयों पर विजय संभव : संतोष दीदी

ब्रह्माकुमारीज़ की संयुक्त मुख्य प्रशासिका एवं समाज सेवा प्रभाग की अध्यक्षा राजयोगिनी संतोष दीदी ने कहा कि इस ईश्वरीय विश्व विद्यालय के दो प्रमुख आधार ज्ञान और राजयोग हैं। उन्होंने कहा कि आज मनुष्य के पास जानकारी तो बहुत है, लेकिन स्वयं की वास्तविक पहचान का ज्ञान नहीं है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि बुरी आदतों को छोड़ने के लिए शारीरिक नहीं, बल्कि आत्मिक शक्ति की आवश्यकता होती है और यह शक्ति परमात्मा से राजयोग के अभ्यास द्वारा प्राप्त होती है। कर्म सिद्धांत की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि जैसा बीज बोया जाता है, वैसा ही फल जीवन में प्राप्त होता है।

भारतीय संस्कृति ही विश्व में हमारी पहचान : करूणा भाई

संस्था के महासचिव राजयोगी बीके करूणा भाई ने कहा कि आज भारत विश्व की अग्रणी शक्तियों में स्थान बना रहा है, किंतु उसकी सबसे बड़ी पहचान उसकी आदि सनातन संस्कृति और श्रेष्ठ संस्कार हैं।

उन्होंने अपने बचपन का स्मरण करते हुए बताया कि भोजन से पूर्व भजन और मंत्रों का अभ्यास उनके जीवन के स्थायी संस्कार बने, जिन्होंने उन्हें आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ाया।

ध्यान, सेवा और संकल्प का संगम

गुलबर्गा से आईं सबज़ोन समन्वयक बीके शिवलीला बहन ने राजयोग मेडिटेशन द्वारा गहन शांति का अनुभव कराया। चंडीगढ़ से आईं समाज सेवा प्रभाग की क्षेत्रीय संयोजिका बीके पूनम बहन ने सभी प्रतिभागियों को समाज सेवा एवं बुजुर्गों की देखभाल का संकल्प दिलाया।

सम्मेलन को दिल्ली क्षेत्र की जोनल समन्वयक राजयोगिनी आशा दीदी, राष्ट्रीय संयोजक बीके अवतार भाई तथा वाइस चेयरपर्सन बीके प्रेम भाई ने भी संबोधित कर विश्व कल्याण हेतु आध्यात्मिक जागृति का संदेश दिया।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यालय संयोजक बीके बीरेन्द्र भाई ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया, जबकि मंच संचालन डूंगरपुर सेवाकेंद्र की संचालिका बीके विजयलक्ष्मी बहन ने किया।
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