- भारतीय ज्ञान परंपरा पर गर्व करें युवा, साहित्य और संस्कृति को समृद्ध बनाने में दें योगदान: राज्यपाल हरिभाऊ बागडे
- नीमराना में अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव ‘वर्ड्स बियॉन्ड बॉर्डर्स-2026’ का समापन, 73 वक्ताओं ने 35 सत्रों में रखे विचार
जयपुर/कोटपूतली-बहरोड़,
27 अक्टूबर। राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे
ने कहा कि भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत विश्वभर में
विशिष्ट पहचान रखती है। युवाओं को अपनी बौद्धिक परंपराओं से प्रेरणा लेकर ज्ञान एवं
कौशल विकसित करना चाहिए और राष्ट्र के विकास के साथ साहित्य तथा संस्कृति को समृद्ध
बनाने में योगदान देना चाहिए।
भारतीय ज्ञान-विज्ञान की परंपरा विश्व के लिए प्रेरणास्रोत
राज्यपाल मंगलवार को रैफल्स यूनिवर्सिटी,
नीमराना में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव ‘वर्ड्स बियॉन्ड बॉर्डर्स’
(WBB)-2026 के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत प्राचीन काल
से ही ज्ञान-विज्ञान का प्रमुख केंद्र रहा है। शून्य और दशमलव पद्धति जैसी महत्वपूर्ण
देन भारतीय ज्ञान परंपरा की उपलब्धियों को दर्शाती हैं। वेदों और उपनिषदों में निहित
ज्ञान आज भी प्रासंगिक है।

रैफल्स यूनिवर्सिटी, नीमराना में आयोजित अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव ‘वर्ड्स बियॉन्ड बॉर्डर्स-2026’ के समापन समारोह को संबोधित करते हुए राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे।
राजस्थान की विरासत में समाहित है गौरवशाली इतिहास
श्री बागडे ने कहा कि राजस्थान वीरता के
साथ-साथ साहित्य, कला और संस्कृति की भी समृद्ध भूमि है। यहां के किले, महल और ऐतिहासिक
इमारतें भारतीय स्थापत्य कला, सांस्कृतिक चेतना और गौरवशाली इतिहास की जीवंत अभिव्यक्ति
हैं। उन्होंने रवीन्द्रनाथ टैगोर की साहित्यिक उपलब्धियों और मैक्स मूलर द्वारा भारतीय
साहित्य के अनुवाद के माध्यम से भारतीय ज्ञान को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने में निभाई
गई भूमिका का भी उल्लेख किया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय मूल्यों को दे रही बढ़ावा
राज्यपाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020
की सराहना करते हुए कहा कि यह भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और मूल्यों को शिक्षा
व्यवस्था से जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल है। शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान तक
सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में मौलिक चिंतन, रचनात्मकता, तार्किक
दृष्टिकोण, मानवीय संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी होना चाहिए।
उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए देश की प्रगति में सक्रिय
भूमिका निभाने का आह्वान किया।
35 सत्रों में 73 वक्ताओं ने साझा किए विचार
डॉ. ध्यानेश्वर मुले, एमओपी, फाउंडेशन फॉर आर्ट एंड लिटरेचर (FOCAL) तथा रैफल्स यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में तीन दिनों के दौरान 35 सत्र हुए, जिनमें दुनियाभर के लगभग 73 वक्ताओं ने भाग लिया। साहित्य, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा सहित विभिन्न विषयों पर हुए विचार-विमर्श ने अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक संवाद, वैचारिक आदान-प्रदान और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को साझा करने का मंच प्रदान किया।