कोटा, 11 अक्टूबर। राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत और लोक आस्था के प्रतीक 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेले का रविवार को श्रीराम रंगमंच पर भव्य एवं गरिमामय समारोह के साथ औपचारिक शुभारंभ हुआ। शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर सहित अन्य अतिथियों ने मेला ध्वज फहराकर, रंग-बिरंगे गुब्बारे आकाश में छोड़कर और आतिशबाजी के बीच मेले के उद्घाटन की घोषणा की। इस अवसर पर मेले की आधिकारिक वेबसाइट kotadussehramela.in का भी लोकार्पण किया गया।
लोक
आस्था और एकता का प्रतीक है कोटा का दशहरा मेला : मदन दिलावर
समारोह के मुख्य अतिथि शिक्षा एवं
पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि कोटा का दशहरा मेला लोक आस्था, सामाजिक
एकता और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक है। उन्होंने निर्देश दिए कि मेले से जुड़े
व्यापारियों, स्थानीय कलाकारों, दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं और कर्मचारियों
को पूरा सम्मान मिले। साथ ही, सभी के लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
विरासत
और विकास का दिखेगा संगम
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि
सभी के सामूहिक प्रयासों से दशहरा मेले को और अधिक आकर्षक बनाया जाएगा। मेले में
विरासत और विकास का अनूठा समन्वय देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि कोटा को शिक्षा
नगरी के साथ-साथ प्रमुख पर्यटन नगरी के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना
सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
नवरात्रि और रावण दहन की परंपरा का
उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह अवसर असत्य पर सत्य की विजय का संदेश देता है।
साथ ही, प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन की बुराइयों को समाप्त करने की प्रेरणा भी
देता है।
सांस्कृतिक
परंपराओं से जुड़ा है कोटा का दशहरा मेला
लाडपुरा विधायक कल्पना देवी ने कहा कि
कोटा दशहरा मेले की परंपराओं से उनके परिवार का ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है। उन्होंने
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की प्रेरणा का उल्लेख करते हुए कहा कि कोटा में विरासत और
विकास का बेहतर समन्वय देखने को मिल रहा है। उन्होंने महिलाओं के सम्मान को सच्ची
पूजा का स्वरूप बताया।
शहर भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश जैन ने
मेले को जन-आस्था और सपनों का संगम बताया। वहीं, महापौर अनुसूइया गोस्वामी ने कहा
कि कोटा दशहरा मेला शहर की गौरवशाली विरासत है। पीढ़ियां बदलने के बावजूद इस मेले
के प्रति लोगों का भावनात्मक जुड़ाव आज भी कायम है।
उपमहापौर विवेक राजवंशी ने भी मेले को
देशभर में विशिष्ट पहचान दिलाने के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि यह कोटा की
सांस्कृतिक धरोहर है और इसे और बेहतर बनाने में शहरवासियों का सहयोग महत्वपूर्ण
है।
सुरक्षित
व्यवस्थाओं और बेहतर सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर जोर
अतिथियों का स्वागत करते हुए मेला
अधिकारी एवं नगर निगम आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने कहा कि कोटा दशहरा मेला सामाजिक
समरसता, व्यापार और लोक कला का जीवंत प्रमाण है। उन्होंने आश्वस्त किया कि
जनप्रतिनिधियों के मार्गदर्शन में इस बार मेले में दर्शकों के लिए सुरक्षित
वातावरण, बेहतर व्यवस्थाएं और आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम उपलब्ध कराने के प्रयास
किए जाएंगे।
कार्यक्रम के अंत में उपायुक्त भावना
सिंह ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
कोटा का दशहरा मेला न केवल धार्मिक
आस्था का केंद्र है, बल्कि राजस्थान की लोक संस्कृति, परंपराओं, व्यापार और
सामाजिक एकता को प्रदर्शित करने वाला महत्वपूर्ण आयोजन भी है।
English Title - Grand Inauguration of Kota's 133rd National Dussehra Fair, Education Minister Madan Dilawar Hoists Flag

