नई शिक्षा नीति भारतीय संस्कृति से जोड़ती है: राज्यपाल हरिभाऊ बागडे

नई शिक्षा नीति भारतीय संस्कृति और वास्तविक इतिहास से नई पीढ़ी को जोड़ने वाली पहल : राज्यपाल हरिभाऊ बागडे


  • ‘संघ से राष्ट्रबोध: शताब्दी यात्रा के विभिन्न पड़ाव’ पुस्तक का लोकार्पण, वक्ताओं ने राष्ट्र निर्माण में संघ के योगदान को सराहा

जयपुर, 28 अक्टूबर। राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि नई शिक्षा नीति भारतीय संस्कृति, परंपराओं और वास्तविक इतिहास से नई पीढ़ी को परिचित कराने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है। यह देश की सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने के साथ बौद्धिक क्षमता के विकास में भी सहायक है। वे बुधवार को पाथेय भवन में ‘संघ से राष्ट्रबोध: शताब्दी यात्रा के विभिन्न पड़ाव’ पुस्तक के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे।

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जयपुर के पाथेय भवन में ‘संघ से राष्ट्रबोध: शताब्दी यात्रा के विभिन्न पड़ाव’ पुस्तक का लोकार्पण करते हुए राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे। साथ में विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संगठन महामंत्री श्री अजेय कुमार, पंडित राजकुमार शर्मा एवं अन्य गणमान्यजन।

राष्ट्र निर्माण में संघ की भूमिका महत्वपूर्ण

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पुस्तक लोकार्पण के अवसर पर पाथेय भवन, जयपुर में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति भारतीय संस्कृति और वास्तविक इतिहास से नई पीढ़ी को जोड़ने वाली पहल है।

राज्यपाल बागडे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सौ वर्ष की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ श्रेष्ठ नागरिकों के निर्माण और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना विकसित करने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि संघ से जुड़ने वाले स्वयंसेवक राष्ट्रहित में निरंतर योगदान देते हैं। वर्ष 1925 में स्थापना के बाद से संघ ने नैतिकता, ईमानदारी और राष्ट्रसेवा के मूल्यों को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि संघ के कार्यकर्ताओं के समर्पण और तपस्या से देश विकास के पथ पर आगे बढ़ा है।

राष्ट्र केवल भूभाग नहीं, सांस्कृतिक जीवनदृष्टि है

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि राष्ट्र केवल एक भूभाग नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक जीवनदृष्टि है। संघ की सौ वर्ष की यात्रा में संगठित और चरित्रवान व्यक्तियों के निर्माण का महत्वपूर्ण कार्य हुआ है। उन्होंने कहा कि संघ राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ जन निर्माण को प्रेरित करता है। सेवा बस्तियों में किए जा रहे कार्यों और सामाजिक समरसता के प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

त्याग और राष्ट्रसमर्पण का संदेश

संघ के संगठन महामंत्री अजेय कुमार ने कहा कि संघ ने ‘देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें’ की भावना को जन-जन तक पहुंचाया है। व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र की उन्नति और प्रगति में योगदान देना संघ की कार्यपद्धति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने राष्ट्र के प्रति समर्पण का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के मन में यह संकल्प होना चाहिए कि व्यक्तिगत अस्तित्व से ऊपर राष्ट्र का अस्तित्व है।

संस्कृति और सनातन मूल्यों पर दिया जोर

पंडित राजकुमार शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति विज्ञानसम्मत दृष्टिकोण पर आधारित है। उन्होंने ऐसी सांस्कृतिक चेतना अपनाने पर बल दिया, जो समाज को पाखंड और अंधविश्वास से मुक्त करते हुए स्वयं के प्रति सम्मान और राष्ट्र के प्रति प्रेम की भावना विकसित करे। उन्होंने इसे सनातन धर्म और संस्कृति के मूल भाव से जोड़ा।

पुस्तक से संघ की यात्रा को समझने में मिलेगी मदद

राज्यपाल बागडे ने पुस्तक का लोकार्पण करते हुए कहा कि यह कृति राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा, कार्यों और शताब्दी यात्रा को गहराई से समझने में सहायक होगी। समारोह में वक्ताओं ने संघ की सौ वर्ष की यात्रा और राष्ट्र निर्माण में उसके योगदान को रेखांकित किया।

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