- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साझा किया प्रकृति संरक्षण का संदेश देने वाला संस्कृत सुभाषितम्
- प्रकृति की रक्षा और पोषण से ही लोककल्याण व समृद्धि संभव, संस्कृत श्लोक में निहित है पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा
नई दिल्ली,
28 अक्टूबर। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने
बुधवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया। इसमें प्रकृति
की रक्षा और उसके पोषण को सभी के कल्याण एवं समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण बताया गया
है। यह सुभाषितम् प्रकृति और मानव जीवन के बीच गहरे संबंध को रेखांकित करता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आज X (Twitter) पर साझा किया गया सुभाषितम्। इस श्लोक में प्रजा-पालन और राजधर्म के महत्व को बताया गया है।
संस्कृत सुभाषितम् में प्रकृति संरक्षण का संदेश
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया
सुभाषितम् है—
पालयन् प्रकृतिं
राजा सुखी भवति नान्यथा।
प्रकृतिश्च हिता
यस्य स राजा सर्वकामधुक्॥
क्या है इस
सुभाषितम् का भावार्थ?
इसका भावार्थ है कि जो शासक प्रकृति
की रक्षा करता है और उसके हितों का ध्यान रखता है, वही वास्तविक सुख और समृद्धि
प्राप्त करता है। प्रकृति का संरक्षण करने और उसके कल्याण के लिए कार्य करने से
समाज की आवश्यकताओं तथा आकांक्षाओं की पूर्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
प्रकृति की रक्षा में ही निहित है सबका कल्याण
यह सुभाषितम् संदेश देता है कि प्रकृति केवल जीवन का आधार नहीं, बल्कि मानव समाज की सुख-समृद्धि का भी महत्वपूर्ण स्रोत है। पर्यावरण की रक्षा, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और प्रकृति के प्रति जिम्मेदार व्यवहार एक बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए आवश्यक हैं। इसका संदेश है कि प्रकृति के हितों की रक्षा करना समस्त समाज के कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। समस्त समाज के कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
